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समय पर पहचान से ऑटिज्म पर पाया जा सकता है काबू: डॉ. रोहित गुप्ता

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विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के अवसर पर ग्रेटर फरीदाबाद सेक्टर-86 स्थित एकॉर्ड अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. रोहित गुप्ता ने लोगों को ऑटिज्म के प्रति जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने बताया कि ऑटिज्म एक न्यूरो-डेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जो बच्चों के व्यवहार, संवाद और सामाजिक संपर्क को प्रभावित करता है।डॉ. रोहित गुप्ता ने बताया कि ऑटिज्म के लक्षण आमतौर पर 2 से 3 वर्ष की उम्र में दिखाई देने लगते हैं।

बच्चों का आंखों से संपर्क कम करना, नाम पुकारने में दिक्कत, बोलने में देरी होना या एक ही गतिविधि को बार-बार दोहराना इसके प्रमुख संकेत हैं। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे इलाज में देरी हो जाती है।उन्होंने कहा कि बीमारी का समय पर पहचान और सही थेरेपी से बच्चों के व्यवहार और कौशल में काफी सुधार किया जा सकता है। स्पीच थेरेपी, बिहेवियर थेरेपी और विशेष शिक्षा इसके प्रभावी उपाय हैं।डॉ. गुप्ता ने अभिभावकों से अपील की कि यदि बच्चे के व्यवहार में कोई असामान्यता दिखे तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें। समाज में भी ऐसे बच्चों को समझने और स्वीकार करने की जरूरत है, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही ऑटिज्म से निपटने का सबसे बड़ा हथियार है। सही जानकारी और सहयोग से ऐसे बच्चों को मुख्यधारा में लाया जा सकता है और उनका भविष्य बेहतर बनाया जा सकता है।

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