वॉशिंगटन/तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए अब ‘टैंकर के बदले टैंकर’ (Tanker for Tanker) नीति अपनाई है। इस नई रणनीति के तहत ईरान अगर होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक या सहयोगी देशों के तेल टैंकरों को निशाना बनाता है, तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई में ईरानी टैंकरों को निशाना बना सकता है।
अमेरिका ने दो ईरानी टैंकरों को बनाया निशाना
रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने मंगलवार को ईरान के दो सरकारी टैंकरों पर हमला किया। यह पहली बार बताया जा रहा है जब अमेरिका ने होरमुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर ईरानी हमलों के जवाब में सीधे ईरानी टैंकरों को निशाना बनाया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन टैंकरों के इंजन रूम को ड्रोन से दागी गई मिसाइलों से निशाना बनाया गया।
अमेरिका की इस कार्रवाई को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी वाली नई ‘टैंकर के बदले टैंकर’ नीति का हिस्सा बताया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य ईरान को वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों पर हमले से रोकना है।
करीब 100 ठिकानों पर हमले
अमेरिकी कार्रवाई केवल टैंकरों तक सीमित नहीं रही। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, मंगलवार को ईरान में करीब 100 ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के एयर डिफेंस सिस्टम, रडार, संचार केंद्र, समुद्री सुरंग बिछाने की क्षमता, एंटी-शिप क्रूज मिसाइल लॉन्चर और ड्रोन लॉन्चिंग सिस्टम शामिल बताए गए हैं।
क्या है ‘टैंकर के बदले टैंकर’ रणनीति?
इस नीति का सीधा मतलब है कि अमेरिका अब ईरान के किसी वाणिज्यिक जहाज या टैंकर पर हमले को केवल समुद्री सुरक्षा का मामला मानकर रोकने की कोशिश नहीं करेगा, बल्कि उसके जवाब में ईरान के तेल टैंकरों को भी निशाना बनाने की नीति अपना रहा है।
होरमुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहां किसी भी बड़े सैन्य टकराव से वैश्विक तेल आपूर्ति, शिपिंग और ऊर्जा बाजार पर असर पड़ सकता है। हाल में इस क्षेत्र में तेल टैंकरों पर हमलों की घटनाओं ने चिंता और बढ़ा दी है।
आगे क्या होगा?
अमेरिका की नई नीति से ईरान-अमेरिका टकराव के और बढ़ने की आशंका है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर दोनों पक्ष एक-दूसरे के जहाजों को लगातार निशाना बनाते हैं तो होरमुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। इससे तेल की कीमतों और वैश्विक शिपिंग लागत पर भी दबाव बढ़ सकता है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि ईरान अमेरिकी हमलों का क्या जवाब देता है और ट्रंप प्रशासन अपनी नई ‘टैंकर के बदले टैंकर’ रणनीति को आगे किस स्तर तक ले जाता है।