नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर दुनिया के सामने तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सऊदी अरब ने ड्रोन हमले के बाद अपनी महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। यह पाइपलाइन सऊदी अरब के तेल को फारस की खाड़ी से होते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य से बचाकर लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक पहुंचाने का वैकल्पिक रास्ता देती है।
1,200 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन क्यों है अहम?
सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन करीब 1,200 किलोमीटर लंबी है। हाल के महीनों में इसके जरिए करीब 40-50 लाख बैरल तेल प्रतिदिन भेजा जा रहा था, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 4-5 फीसदी है। ऐसे में इसका बंद होना अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार के लिए बड़ी चिंता माना जा रहा है।
सऊदी ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक पाइपलाइन को हमले के बाद एहतियात के तौर पर बंद किया गया है। इससे पहले यह पाइपलाइन होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई बाधाओं के बीच सऊदी तेल निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक मार्ग बन गई थी।
होर्मुज में पहले से क्यों बढ़ी हुई है चिंता?
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल समुद्री मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में युद्ध और सुरक्षा तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही काफी कम हुई है। 14 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक सप्ताहांत में यहां जहाजों की आवाजाही 10-दिन के औसत से काफी नीचे रही।
ऐसे में सऊदी की पाइपलाइन बंद होने का मतलब यह है कि तेल सप्लाई के एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक रास्ते पर भी दबाव बढ़ गया है।
तेल की कीमतों पर पड़ा असर
पाइपलाइन हमले और होर्मुज में तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। Reuters के मुताबिक ब्रेंट क्रूड करीब 107-108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है।
अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है और तेल की सप्लाई प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है।
क्या भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होगा?
भारत के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली जरूर है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहने पर भारतीय तेल कंपनियों की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर आगे चलकर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है।
हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत में पेट्रोल-डीजल तुरंत महंगा हो जाएगा। कीमतों पर असर कई चीजों पर निर्भर करेगा—कच्चे तेल की कीमत कितने समय तक ऊंची रहती है, भारत को किस कीमत पर तेल मिलता है, रुपये-डॉलर की विनिमय दर क्या रहती है और घरेलू स्तर पर सरकार व तेल कंपनियां क्या कदम उठाती हैं।
भारत सरकार पहले भी पश्चिम एशिया संकट के दौरान पेट्रोल-डीजल और LPG की घरेलू उपलब्धता बनाए रखने के लिए कदम उठाने की बात कह चुकी है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे बड़ी नजर सऊदी पाइपलाइन की बहाली, होर्मुज में जहाजों की आवाजाही और पश्चिम एशिया में संघर्ष की स्थिति पर है। अगर वैकल्पिक तेल मार्ग भी लंबे समय तक बाधित रहते हैं, तो वैश्विक बाजार में सप्लाई का दबाव बढ़ सकता है और इसका असर भारत समेत दुनिया के कई देशों पर पड़ सकता है।
यानी अभी पेट्रोल-डीजल महंगा होने की सीधी घोषणा नहीं हुई है, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी रही तो आने वाले दिनों में भारत में ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका जरूर है।