IIT बॉम्बे केस में उठे सवाल: क्या परीक्षा में नकल पर डांटना जातिसूचक टिप्पणी माना जा सकता है?
मुंबई स्थित IIT बॉम्बे में छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। छात्र के परिवार ने आरोप लगाया है कि साहिल को कथित तौर पर जातिगत टिप्पणियों और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था। वहीं, संस्थान ने जातिगत भेदभाव के आरोपों से इनकार किया है। मामले की जांच के बीच शिक्षाविदों और फैकल्टी सदस्यों ने शैक्षणिक अनुशासन, छात्र सहायता और कैंपस में मानसिक दबाव को लेकर कई सवाल उठाए हैं।
नकल के आरोप से शुरू हुआ विवाद
रिपोर्टों के मुताबिक, साहिल वाकोडे को एक परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़े जाने और कथित तौर पर परीक्षा के सवालों के जवाब के लिए ChatGPT का इस्तेमाल करने का मामला सामने आया था। IIT बॉम्बे ने कहा है कि छात्र के खिलाफ तत्काल कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी और उसे संबंधित शिक्षकों तथा विभागाध्यक्ष की ओर से काउंसलिंग दी गई थी।
इसी घटना के बाद साहिल की मौत ने परीक्षा में अनुशासन और छात्रों की मानसिक स्थिति के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज कर दी है।
शिक्षाविदों ने उठाया बड़ा सवाल
मामले पर चर्चा के दौरान कुछ शिक्षाविदों ने सवाल उठाया है कि अगर कोई शिक्षक छात्र को परीक्षा में नियम तोड़ने या नकल करने पर डांटता है, तो क्या हर ऐसी फटकार को जातिसूचक टिप्पणी माना जा सकता है? एक IIT निदेशक के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि नियम तोड़ने पर शिक्षक द्वारा छात्र को फटकार लगाना अपने आप में जातिसूचक गाली नहीं माना जा सकता। हालांकि, यदि किसी टिप्पणी में वास्तव में जाति आधारित अपमान या भेदभाव के तत्व हों, तो उसकी अलग जांच जरूरी है।
परिवार ने लगाए जातिगत भेदभाव के आरोप
साहिल के पिता ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे को कई महीनों तक कथित तौर पर जातिगत टिप्पणियों और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्रोफेसर और दो अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिसमें आत्महत्या के लिए उकसाने और SC/ST कानून की संबंधित धाराएं शामिल हैं। हालांकि, इन आरोपों की जांच अभी जारी है।
IIT बॉम्बे ने आरोपों से किया इनकार
IIT बॉम्बे ने जातिगत भेदभाव के आरोपों से इनकार किया है। संस्थान का कहना है कि छात्र की ओर से SC-ST सेल या प्रशासन के पास ऐसी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। वहीं, मामले को लेकर कैंपस में विरोध प्रदर्शन जारी हैं और छात्र कल्याण तथा मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की मांग भी उठ रही है।
अकादमिक दबाव पर भी बहस
कुछ छात्रों ने जातिगत भेदभाव के आरोपों को लेकर अलग राय व्यक्त करते हुए अकादमिक दबाव और इंजीनियरिंग की पढ़ाई के तनाव को भी मामले का महत्वपूर्ण पहलू बताया है। छात्रों का कहना है कि घटना की पूरी परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और संस्थान को छात्र कल्याण एवं मानसिक स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था को और मजबूत करना चाहिए।
फिलहाल साहिल वाकोडे की मौत से जुड़े आरोपों और परिस्थितियों की जांच जारी है। इस मामले ने IIT जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुशासन, छात्र अधिकार, जातिगत भेदभाव के आरोप और मानसिक स्वास्थ्य सहायता के बीच संतुलन को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है।