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सेवा, समर्पण और श्रद्धा के साथ श्रीसिद्धदाता आश्रम में धूमधाम से मनाया गया श्रीहनुमान जन्मोत्सव 🙏

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फरीदाबाद , अंजनी पुत्र महाबल दाई, संतन के प्रभु सदा सहाई। ऐसे ही गुणगान करते हुए गुरुवार को सूरजकुंड मार्ग स्थित श्रीलक्ष्मीनारायण दिव्यधाम-श्रीसिद्धदाता आश्रम में श्रीरामभक्त श्रीहनुमान जी का जन्मोत्सव आस्था और श्रद्धा के साथ धूमधाम से मनाया गया। श्रीरामानुज संप्रदाय के पवित्र तीर्थ पीठ इंद्रप्रस्थ एवं हरियाणा के पीठाधीश्वर अनंत विभूषित श्रीमद जगदगुरु श्रीरामानुजाचार्य स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज के सान्निध्य में स्वामी सुदर्शनाचार्य वेद वेदांग संस्कृत महाविद्यालय के विद्यार्थियों और आचार्यो द्वारा श्रीहनुमान जी का अभिषेक किया गया।

अभिषेक के उपरांत आश्रम की परिक्रमा मार्ग में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। बैंडबाजों और ढोल-नगाड़ो की गूंज, पताकाओं और झांकियों से सजी श्रीहनुमान जी की शोभायात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता। भक्त संगीतमयी भजनों की धुन पर नाचत-गाते आगे बढ़ते रहे। पालकी में श्रीहनुमान जी चले और खुली जीप में स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने श्रीहनुमान जन्मोत्सव के आनंदपूर्ण वातावरण में भक्तो का उत्साहवर्द्धन किया।

पूरा वातावरण जयश्रीराम और बजरंगबली के उदघोष से गूंज उठा।श्रीसिद्धदाता आश्रम-श्रीलक्ष्मीनारायण दिव्यधाम के अधिपति एवं श्रीरामानुज संप्रदाय के पवित्र तीर्थ पीठ इंद्रप्रस्थ एवं हरियाणा के पीठाधीश्वर अनंत विभूषित श्रीमद जगदगुरु श्रीरामानुजाचार्य स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने श्रद्धालुओ के बीच अपने प्रवचन में कहा कि श्रीहनुमान जी सेवा और समर्पण के सर्वोच्च प्रतीक है।श्रीरामानुज संप्रदाय के सिद्धांत “कैंकर्य लक्षण विलक्षण मोक्ष भाज” का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि सेवा ही मुक्ति का मार्ग है। अर्थात सेवा के माध्यम से मोक्ष प्राप्त करना।

सेवा करने वाले को दास भाव रखना चाहिए और सेवा निष्काम होनी चाहिए। बिना किसी अपेक्षा के अंहकार से दूर रहकर ही भक्ति संभव है। उन्होंने श्रीहनुमान जी को आदर्श बताते हुए कहा कि श्रीहनुमान जी ने दास भाव से भगवान की प्राप्ति की और आज उनका स्थान अत्यंत उच्च है। अभिप्रायं यो विदित्वा तु भर्तु: सर्वाणि कार्याणि करोत्यतन्द्री। वक्ता हितनामनुरक्त आर्य: शक्तिज्ञ आत्मेव हि सोण्नुकम्प्य: अर्थात जो सेवक स्वामी के अभिप्राय को समझकर आलस्यरहित हो समस्त कार्यो को पूरा करता है, जो हित की बात करने वाला स्वामी भक्त सज्जन और राजा की शक्ति को जानने वाला है, उसे अपने समान समझकर कृपा करनी चाहिए। इस बीच श्रीगुरु महाराज ने श्रद्धालुओं को प्रसाद और आशीर्वाद प्रदान किया।

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