ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग: दिल्ली से मुंबई तक तीन दिनों में क्या-क्या हुआ?
नई दिल्ली/मुंबई: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले तीन दिनों में दिल्ली और मुंबई समेत कई शहरों में विरोध-प्रदर्शन तेज हुए हैं। प्रदर्शनकारियों और विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज करता रहा है और SIR को मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया बताता है।
2 अक्टूबर: दिल्ली में प्रदर्शन, बड़ी संख्या में हिरासत
2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के दिन दिल्ली, मुंबई समेत कई शहरों में CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए। दिल्ली में विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और युवा संगठनों के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। जंतर-मंतर और उसके आसपास पुलिस ने बैरिकेडिंग की और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक दिल्ली में करीब 1,100 लोगों को हिरासत में लिया गया।
मुंबई में इसी दिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से शिवाजी पार्क में प्रदर्शन किया गया। संगठन ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई और आगे भी आंदोलन जारी रखने की बात कही।
3 अक्टूबर: FIR और ‘जंतर-मंतर 2.0’ का ऐलान
दिल्ली में 2 अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद पुलिस ने जंतर-मंतर से जुड़े मामले में तीन FIR दर्ज कीं। प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की ओर से सवाल भी उठाए गए।
इधर मुंबई में CJP की ओर से आंदोलन को आगे बढ़ाने का ऐलान किया गया। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए दिल्ली में ‘जंतर-मंतर 2.0’ प्रदर्शन की बात कही। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन का आह्वान भी किया गया है।
4 अक्टूबर: मुंबई में ठाकरे बंधुओं का बड़ा मार्च
4 अक्टूबर को मुंबई में विरोध प्रदर्शन और बड़ा हो गया। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने संयुक्त रूप से ‘विराट गर्जना मोर्चा’ निकाला। इस प्रदर्शन में कांग्रेस और शरद पवार गुट वाली NCP (SP) के नेता भी शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और महाराष्ट्र में मतदाता सूची के SIR को रद्द करना शामिल रहा। राज ठाकरे ने चुनाव में EVM की जगह बैलेट पेपर से मतदान की मांग भी उठाई।
इसी दिन दिल्ली में भी विरोध प्रदर्शन जारी रहा। पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। Reuters के मुताबिक कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की और हिरासत में लिए गए लोगों को ले जा रहे वाहनों को रोकने की कोशिश भी हुई।
विवाद की जड़ क्या है?
विरोध का एक बड़ा मुद्दा Special Intensive Revision (SIR) यानी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है। विपक्ष और प्रदर्शनकारी समूहों ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। चुनाव आयोग और बीजेपी इन आरोपों से इनकार करते हैं।
इसके अलावा चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर भी विवाद सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर कई बार आपत्तियां दर्ज की थीं।
5 अक्टूबर: सुप्रीम कोर्ट में मामला
5 अक्टूबर को ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने तत्काल CEC को निलंबित करने या हटाने का अंतरिम आदेश देने के बजाय चुनाव आयोग, CEC और दोनों चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया।
इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने SIR से जुड़े कई फैसलों, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता डेटा से संबंधित मुद्दों की जांच की मांग की है।
अभी क्या स्थिति है?
फिलहाल ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया है। उनके इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली और मुंबई में आंदोलन जारी हैं। मुंबई में ठाकरे बंधुओं के संयुक्त प्रदर्शन और दिल्ली में लगातार विरोध के बाद यह मामला अब सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।
आने वाले दिनों में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट की आगे की कार्यवाही इस पूरे विवाद की दिशा के लिए महत्वपूर्ण होगी।