DUSU में निर्दलीय दीपांशु शौकीन की जीत, कांग्रेस की हार पर बोले- ग्राउंड लेवल पर बड़ा गैप, राहुल गांधी का भी लिया नाम

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2026 में निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज कर बड़ा उलटफेर किया है। शौकीन को 30,615 वोट मिले। वहीं कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI के उम्मीदवार वीर चतरथ को 4,313 वोट मिले। इस चुनाव में NSUI केंद्रीय पैनल की चारों सीटों में से किसी पर भी जीत दर्ज नहीं कर सकी, जबकि ABVP ने तीन पदों पर जीत हासिल की।
दीपांशु शौकीन पहले NSUI से जुड़े रहे हैं। टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया और उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल की। चुनाव के बाद उन्होंने कांग्रेस और NSUI की हार के कारणों पर अपनी राय रखी। उनके मुताबिक संगठन और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेतृत्व को यह समझने की जरूरत है कि कैंपस में कौन छात्र नेताओं के साथ है और Gen Z के मुद्दों को कौन बेहतर तरीके से समझ रहा है।
‘राहुल गांधी Gen Z को समझते हैं’
दीपांशु शौकीन ने राहुल गांधी की ‘छात्रों की गूंज’ मुहिम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी युवाओं और Gen Z के मुद्दों को समझते हैं, लेकिन उनके मुताबिक यह पहल जमीनी स्तर पर NSUI तक प्रभावी तरीके से नहीं पहुंच सकी। शौकीन ने कहा कि नेतृत्व की बात नीचे तक और जमीनी कार्यकर्ताओं की बात ऊपर तक पहुंचने में अंतर है।
टिकट को लेकर भी उठे सवाल
DUSU चुनाव में दीपांशु शौकीन को NSUI का टिकट नहीं मिला था। इसके बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और 30,615 वोट हासिल कर उपाध्यक्ष पद जीत लिया। दूसरी ओर NSUI के आधिकारिक उम्मीदवार वीर चतरथ को 4,313 वोट मिले। इस नतीजे के बाद संगठन में उम्मीदवार चयन और जमीनी स्तर पर छात्र नेताओं की पहचान को लेकर सवाल उठे हैं।
दीपांशु शौकीन ने अपनी जीत को छात्रों और Gen Z के भरोसे से जोड़ते हुए कहा कि चुनाव का संदेश यह है कि जमीनी स्तर पर छात्रों के बीच काम करने वाले उम्मीदवारों की भूमिका महत्वपूर्ण है। वहीं, DUSU के नतीजों में अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद ABVP के खाते में गए, जबकि उपाध्यक्ष पद निर्दलीय उम्मीदवार के पास गया।