ग्वालियर। ग्वालियर के महाराज बाड़ा स्थित गोरखी परिसर के देवघर में मंगलवार को बाबा मंसूर शाह के उर्स के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की गई। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने परंपरा के अनुसार देवघर पहुंचकर बाबा मंसूर शाह को श्रद्धा अर्पित की और देशवासियों की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।
सिंधिया राजपरिवार में बाबा मंसूर शाह की पूजा की यह परंपरा करीब 300 वर्षों से चली आ रही है। इसका संबंध मराठा योद्धा और सिंधिया राजवंश के संस्थापक महादजी सिंधिया के समय से बताया जाता है।
पानीपत के युद्ध से जुड़ी है परंपरा
प्रचलित ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार वर्ष 1761 में पानीपत के तीसरे युद्ध के दौरान महादजी सिंधिया घायल हो गए थे। उस समय उनके परिवार में उनकी सलामती को लेकर चिंता का माहौल था। बताया जाता है कि महादजी सिंधिया की मां और पत्नी बाबा मंसूर शाह की शरण में पहुंचीं।
लोकमान्यता के अनुसार बाबा मंसूर शाह ने उन्हें भरोसा दिलाया कि महादजी सुरक्षित हैं और जल्द वापस लौटेंगे। महादजी के सकुशल लौटने के बाद परिवार ने इसे संत के आशीर्वाद से जोड़कर देखा।
‘आधी रोटी’ से जुड़ी मान्यता
इसी परंपरा में ‘आधी रोटी’ का प्रसंग भी विशेष रूप से उल्लेखित है। मान्यता के अनुसार बाबा मंसूर शाह ने महादजी सिंधिया को आधी रोटी का एक टुकड़ा आशीर्वाद स्वरूप दिया था और उनके राजवंश की समृद्धि से जुड़ी भविष्यवाणी की थी।
सिंधिया परिवार से जुड़े लोगों के अनुसार, इस परंपरा से संबंधित रोटी के अवशेष आज भी गोरखी के देवघर में सुरक्षित रखे गए हैं और हर वर्ष विधिवत पूजा की जाती है।

सिंधिया ने मांगा सुख-शांति का आशीर्वाद
पूजा-अर्चना के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बाबा मंसूर शाह के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए देशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और सर्वांगीण विकास की प्रार्थना की।
करीब तीन शताब्दियों से चली आ रही यह परंपरा ग्वालियर के इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और सिंधिया राजपरिवार की धार्मिक-सामाजिक परंपराओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।