सुप्रीम कोर्ट पहुंचा चुनाव आयोग का विवाद, सामूहिक फैसलों पर उठे सवाल; अगले हफ्ते सुनवाई
नई दिल्ली: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अगले सप्ताह सुनवाई करने पर सहमति जताई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के नाम पर कुछ फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना लिए गए।
मंगलवार को वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के समक्ष मामले को जल्द सूचीबद्ध करने की मांग की। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।
याचिका में क्या आरोप लगाए गए हैं?
याचिका में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था है और उसके फैसले सामूहिक प्रक्रिया के तहत लिए जाने चाहिए। याचिकाकर्ता का आरोप है कि CEC ज्ञानेश कुमार ने आयोग के अन्य दो सदस्यों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—की मंजूरी के बिना कुछ फैसले लिए।
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324 और 2023 के संबंधित कानून का हवाला देते हुए कहा गया है कि आयोग के फैसले जहां तक संभव हो, सर्वसम्मति से होने चाहिए और मतभेद की स्थिति में बहुमत के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए।
14 फैसलों पर भी उठे सवाल
याचिका में कथित तौर पर करीब 14 ऐसे मामलों का उल्लेख किया गया है, जिन पर अन्य चुनाव आयुक्तों की ओर से आपत्तियां दर्ज किए जाने का दावा किया गया है। याचिकाकर्ता ने आयोग के रिकॉर्ड, एजेंडा और कार्यवाही से जुड़े दस्तावेजों को सुरक्षित रखने तथा कुछ मामलों की जांच की मांग भी की है।
याचिका में वोटर लिस्ट से जुड़े काम, फॉर्म-6 में बदलाव और चुनाव आयोग के डिजिटल सिस्टम से संबंधित कुछ कार्रवाइयों पर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, ये सभी आरोप फिलहाल याचिका में किए गए दावे हैं और इन पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना बाकी है।
चुनाव आयोग का क्या कहना है?
चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि आंतरिक नोट और सदस्यों के बीच मतभेद संस्थागत कामकाज का हिस्सा हो सकते हैं। आयोग के अनुसार उसके अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट की अगले सप्ताह होने वाली सुनवाई में यह मामला आगे बढ़ेगा और अदालत याचिका में उठाए गए सवालों पर सुनवाई करेगी।