नई दिल्ली: देशभर में NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद यह निर्णय आधिकारिक रूप से लागू हो गया। इस घटनाक्रम को केंद्र सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक फैसला माना जा रहा है।धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे के बाद जारी बयान में कहा कि उन्होंने हमेशा देश के छात्रों और शिक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया है, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके और छात्रों व अभिभावकों का शिक्षा व्यवस्था पर विश्वास बना रहे। उन्होंने सभी से शांति बनाए रखने और जांच पूरी होने तक धैर्य रखने की अपील भी की।गौरतलब है कि NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं को लेकर पिछले कई दिनों से देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। छात्र संगठनों, अभिभावकों और विपक्षी दलों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और शिक्षा मंत्री से जवाबदेही तय करने की मांग की थी। बढ़ते जनदबाव के बीच सरकार का यह फैसला सामने आया है।धर्मेंद्र प्रधान जुलाई 2021 से केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यरत थे। उनके कार्यकाल में नई शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने सहित कई अहम फैसले लिए गए। हालांकि हाल के परीक्षा विवादों ने उनके कार्यकाल को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए, जिसके बाद उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया।धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने प्रह्लाद जोशी को देश का नया केंद्रीय शिक्षा मंत्री नियुक्त किया है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद उन्हें शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार का कहना है कि नए शिक्षा मंत्री के नेतृत्व में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जाएगा। साथ ही छात्रों का विश्वास बहाल करने और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक सुधार भी किए जाएंगे।अब पूरे देश की नजर नए शिक्षा मंत्री के अगले कदमों पर है। छात्र, अभिभावक और शिक्षा जगत से जुड़े लोग उम्मीद कर रहे हैं कि नई जिम्मेदारी संभालने के बाद शिक्षा मंत्रालय परीक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाएगा।