पेरिस। रूस–यूक्रेन युद्ध को रोकने और क्षेत्र में शांति बहाल करने की कोशिशें एक बार फिर तेज़ हो गई हैं। इसी सिलसिले में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की सोमवार को पेरिस पहुंचे, जहां उन्होंने एलिसी पैलेस में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से महत्वपूर्ण मुलाक़ात की। लगभग चार साल से चल रहे युद्ध में संभावित युद्धविराम की राह तलाशने के लिए की जा रही हालिया कूटनीतिक पहल में यह बैठक अहम मानी जा रही है।
फ्लोरिडा बैठक के बाद पेरिस पहुँचे जेलेंस्की
पेरिस आने से एक दिन पहले जेलेंस्की ने फ्लोरिडा में अमेरिकी और यूक्रेनी अधिकारियों के साथ हुई एक हाई-लेवल बैठक में हिस्सा लिया था। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस बैठक को “लाभप्रद” बताया था। पेरिस में सोमवार को दोनों पक्षों ने अमेरिका की ओर से प्रस्तावित संघर्षविराम योजना में संभावित संशोधनों पर चर्चा की। यह योजना अमेरिका और रूस के बीच हुई वार्ता के आधार पर तैयार की गई है, लेकिन इसकी आलोचना इसलिए हो रही है क्योंकि इसमें रूसी मांगों को अधिक महत्व देने का आरोप लगाया जा रहा है।
यूरोपीय देशों को कई बिंदुओं पर आपत्ति
यूक्रेन के यूरोपीय सहयोगियों ने अमेरिकी शांति प्रयासों का स्वागत तो किया है, लेकिन योजना के कई मूल तत्वों पर असहमति जताई है। मैक्रों के दफ़्तर ने बैठक से पहले कहा था कि दोनों नेता “निष्पक्ष और स्थायी शांति” की शर्तों पर बातचीत करेंगे।
मुलाक़ात के बाद यह जानकारी भी सामने आई कि मैक्रों और जेलेंस्की ने ब्रिटेन, जर्मनी, पोलैंड, इटली, नॉर्वे, फ़िनलैंड, डेनमार्क और नीदरलैंड समेत कई यूरोपीय देशों के नेताओं से संयुक्त रूप से बात की। यूरोपीय संघ के अधिकारी एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन तथा नाटो महासचिव मार्क रूट भी इस संवाद में शामिल रहे। दोनों नेताओं ने अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से फोन पर भी चर्चा की।
ट्रंप की अनदेखी और मैक्रों की ‘ठोस गारंटी’ की मांग
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले पेश की गई 28-सूत्री शांति रूपरेखा को खास तरजीह नहीं दी। इस प्रस्ताव में यूक्रेन की सेना के आकार में कटौती, नाटो में उसकी सदस्यता रोकने और क्षेत्रीय रियायतों जैसी शर्तें शामिल थीं—जिन्हें यूक्रेन के लिए अस्वीकार्य माना जा रहा है।
पिछले हफ़्ते मैक्रों ने पश्चिमी सहयोगियों से अपील की थी कि किसी भी संभावित युद्धविराम या समझौते की स्थिति में यूक्रेन को ठोस और स्पष्ट सुरक्षा गारंटी दी जानी चाहिए। फ्रांस कई बार यह दोहरा चुका है कि वह यूक्रेन के साथ खड़ा है और शांति योजना में ऐसे तत्वों को संतुलित रखने का पक्षधर है, जिन्हें रूस-हितैषी माना जा रहा है।
रूस और यूरोप की चिंता बढ़ी
उधर, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने पुष्टि की कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मंगलवार को अमेरिकी दूत विटकॉफ से मुलाक़ात करेंगे।
इसी बीच यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कालास ने चिंता जताई कि अमेरिका–रूस वार्ता के चलते यूक्रेन पर और अधिक रियायतों के दबाव बढ़ सकते हैं, जिनमें क्षेत्र छोड़ने जैसी कठिन शर्तें भी शामिल हो सकती हैं।